रघुवीर सहाय जीवनी – Biography of Raghuvir Sahay in Hindi Jivani

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Raghuvir Sahay Biography in Hindi Get Exam Study Notes on Raghuvir Sahay. रघुवीर सहाय का जन्म लखनऊ में हुआ। वहीं से इन्होंने एम.ए. किया। ‘नवभारत टाइम्स के सहायक संपादक – रघुवीर सहाय की जीवनी

रघुवीर सहाय का जन्म लखनऊ में हुआ। वहीं से इन्होंने एम.ए. किया। ‘नवभारत टाइम्स के सहायक संपादक तथा ‘दिनमान साप्ताहिक के संपादक रहे। पश्चात् स्वतंत्र लेखन में रत रहे। इन्होंने प्रचुर गद्य और पद्य लिखे हैं। ये ‘दूसरा सप्तक के कवियों में हैं। मुख्य काव्य-संग्रह हैं : ‘आत्महत्या के विरुध्द, ‘हंसो हंसो जल्दी हंसो, ‘सीढियों पर धूप में, ‘लोग भूल गए हैं, ‘कुछ पते कुछ चिट्ठियां आदि। ये साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित हैं।

रघुवीर सहाय का जन्म लखनऊ में हुआ था। अंग्रेज़ी साहित्य में एम ए (१९५१) लखनऊ विश्वविद्यालय। साहित्य सृजन १९४६ से। पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक नवजीवन (लखनऊ) से १९४९ में। १९५१ के आरंभ तक उपसंपादक और सांस्कृतिक संवाददाता। इसी वर्ष दिल्ली आए। यहाँ प्रतीक के सहायक संपादक (१९५१-५२), आकाशवाणी के समाचार विभाग में उपसंपादक (१९५३-५७)। १९५५ में विमलेश्वरी सहाय से विवाह।

दूसरा सप्तक, सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो हँसो जल्दी हँसो (कविता संग्रह), रास्ता इधर से है (कहानी संग्रह), दिल्ली मेरा परदेश और लिखने का कारण (निबंध संग्रह) उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं।

इसके अलावा ‘बारह हंगरी कहानियाँ’, विवेकानंद (रोमां रोला), ‘जेको’, (युगोस्लावी उपन्यास, ले० येर्ज़ी आन्द्र्ज़ेएव्स्की , ‘राख़ और हीरे'( पोलिश उपन्यास ,ले० येर्ज़ी आन्द्र्ज़ेएव्स्की) तथा ‘वरनम वन'( मैकबेथ, शेक्सपियर ) शीर्षक से हिन्दी भाषांतर भी समय-समय पर प्रकाशित हुए हैं।

रघुवीर सहाय समकालीन हिन्दी कविता के महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं। उनके साहित्य में पत्रकारिता का और उनकी पत्रकारिता पर साहित्य का गहरा असर रहा है। उनकी कविताएँ आज़ादी के बाद विशेष रूप से सन् ’60 के बाद के भारत की तस्वीर को समग्रता में पेश करती हैं। उनकी कविताएँ नए मानव संबंधों की खोज करना चाहती हैं जिसमें गैर बराबरी, अन्याय और गुलामी न हो। उनकी समूची काव्य-यात्रा का केंद्रीय लक्ष्य ऐसी जनतांत्रिक व्यवस्था की निर्मिति है जिसमें शोषण, अन्याय, हत्या, आत्महत्या, विषमता, दासता, राजनीतिक संप्रभुता, जाति-धर्म में बँटे समाज के लिए कोई जगह न हो। जिन आशाओं और सपनों से आज़ादी की लड़ाई लड़ी गई थी उन्हें साकार करने में जो बाधाएँ आ रही हों, उनका निरंतर विरोध करना उनका रचनात्मक लक्ष्य रहा है।

कार्यक्षेत्र

रघुवीर सहाय दैनिक ‘नवजीवन’ में उपसंपादक और सांस्कृतिक संवाददाता रहे। ‘प्रतीक’ के सहायक संपादक, आकाशवाणी के समाचार विभाग में उपसंपादक, ‘कल्पना’ तथा आकाशवाणी, में विशेष संवाददाता रहे। ‘नवभारत टाइम्स’, दिल्ली में विशेष संवाददाता रहे। समाचार संपादक, ‘दिनमान’ में रहे। रघुवीर सहाय ‘दिनमान’ के प्रधान संपादक 1969 से 1982 तक रहे। उन्होंने 1982 से 1990 तक स्वतंत्र लेखन किया। रचना के विषय सहाय ने अपनी कृतियों में उन मुद्दों, विषयों को छुआ जिन पर तब तक साहित्य जगत में बहुत कम लिखा गया था। उन्होंने स्त्री विमर्श के बारे में लिखा, आम आदमी की पीडा ज़ाहिर की और 36 कविताओं के अपने संकलन की पुस्तक ‘आत्महत्या के विरुद्ध’ के जरिए द्वंद्व का चित्रण किया। सहाय एक बडे और लंबे समय तक याद रखे जाने वाले कवि हैं। उन्होंने साहित्य में अक्सर अजनबीयत और अकेलेपन को लेकर लिखी जाने वाली कविताओं से भी परे जाकर अलग मुद्दों को अपनी कृतियों में शामिल किया। सहाय राजनीति पर कटाक्ष करने वाले कवि थे। मूलत: उनकी कविताओं में पत्रकारिता के तेवर और अख़बारी तजुर्बा दिखाई देता था। भाषा और शिल्प के मामले में उनकी कविताएं नागार्जुन की याद दिलाती हैं। अज्ञेय की पुस्तक ‘दूसरा सप्तक’ में रघुवीर सहाय की कविताओं को शामिल किया गया। उस दौर में तीन नाम शीर्ष पर थे – गजानन माधव मुक्तिबोध फंतासी के लिए जाने जाते थे, शमशेर बहादुर सिंह शायरी के लिए पहचान रखते थे, जबकि सहाय अपनी भाषा और शिल्प के लिए लोकप्रिय थे।

साहित्यिक विशेषतये:-

 सहाय न्यू कविता के कवी है | उनकी कुछ प्रमुख कविताए आज्ञेय से संपादित दूसरा सप्तक में संकलित हैं | कविता के अलावा उन्होंने विवेचनात्मक गध भी लिखा | उनके काव्य-संसार मैं आत्मपरक अनुभवों की जगह जनजीवन के आनुभव की रचनात्मक अभिव्यक्ति अपेक्चाक्रित अधिक हैं | वे सामाजिक संदर्भो के व्यापक निरिक्षण, अनुभव और बोध को कविता में वयक करते है |

 रघुवीर सहाए ने काव्य-रचना में अपनी पत्रकार दृष्टी का स्रजनात्मक रूप से उपयोग किया है | वे मानते हैं की अखबार की खबरों में दबि और छिपी हुई अनेक एसी बात  होती है, जिनमे मानवीय पीड़ा छिपी रह जाती हैं | उस छिपी हुई मानवीय पीड़ा की अभिव्यक्ति करना ही कविता का दयित्व हैमन

इस काव्य-दृष्टी के अनुसार ही उन्होंने अपनी नयी काव्य-भाषा का विकास किया है | उनकी काव्य-भाषा सटीक, दो टूक और विवरण प्रधान है | वे अनावश्यक शब्दों के प्रयोग से बचते है | भयाक्रांत अनुभव की आवेग रहित अभिव्यक्ति ही उनकी कविता की प्रमुख विशेषता हैं | रघुवीर सहाए ने मुक्त छंद के साथ-साथ छंद में भी काव्य-रचना की है | जीवन आनुभाओ की अभिव्यक्ति के लिए वे कविता की संरचना में वृत्तांत या कथा का उपयोग करते हैं |

मुख्य कृतियाँ

कविता संग्रह : सीढ़ियों पर धूप में, आत्महत्या के विरुद्ध, हँसो, हँसो, जल्दी हँसो, लोग भूल गए हैं, कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ, एक समय था

कहानी संग्रह : रास्ता इधर से है, जो आदमी हम बना रहे हैं

निबंध संग्रह : दिल्ली मेरा परदेस, लिखने का कारण, ऊबे हुए सुखी, वे और नहीं होंगे जो मारे जाएँगे, भँवर, लहरें और तरंग, अर्थात, यथार्थ का अर्थअनुवाद : बरनमवन (शेक्सपियर के नाटक ‘मैकबेथ’ का अनुवाद), तीन हंगारी नाटक

सामान्य ज्ञान पर आधारित परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्णप्रश्न :

  1. रघुवीर सहाय का जन्म कब हुवा था ? – ९ दिसम्बर १९२९
  2. रघुवीर सहाय का जन्म किस प्रांत के शहर में हुवा था ? – लखनऊ, भारत
  3. रघुवीर सहाय किस साप्ताहिक के संपादक रहे थे ? – दिनमान साप्ताहिक
  4. रघुवीर सहाय कोण थे ? – साहित्यकार व पत्रकार थे
  5. रघुवीर सहाय किसके के महत्वपूर्ण स्तम्भ हैं ? – हिन्दी कविता
  6. रघुवीर सहाय की कविता किसकी खोज करना चाहती हैं ? – नए मानव संबंधों की
  7. रघुवीर सहाय ने किस साहित्य में एम ए किया ? – अंग्रेजी
  8. रघुवीर सहाय ने एम ए किस विश्वविद्यालय से किया ? – लखनऊ विश्वविद्यालय
  9. रघुवीर सहाय ने एम ए की डिग्री कब प्राप्त की ? – १९५१
  10. रघुवीर सहाय का निधन कब हुवा था ? – ३० दिसम्बर १९९०

रघुवीर सहाय की जीवनी (Raghuvir Sahay Biography in Hindi Study Notesपर आधारित परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्णप्रश्न :

In conclusion, Raghuvir Sahay Biography in Hindi – रघुवीर सहाय की जीवनी and All Study Notes GK Questions are an important . In addition For General Knowledge Questions Visit Our GK Based Website @ www.upscgk.com

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